Allu Arjun की ‘Pushpa’ में महिलाओं के ये 4 सीन आज के जमाने की हकीकत है!

Allu Arjun film Pushpa: The Rise 4 scene based on women real life: पुरुषों अपनी सोच को बड़ा करो. क्योंकि महिलाएं ब्रेस्ट और वजाइना से बढ़कर सबसे पहले एक इंसान हैं.

सिनेमा जगत में आजकल सिर्फ एक ही नाम ट्रेंड कर रहा है अल्लू अर्जुन (Allu Arjun). इनकी फिल्म ‘पुष्पा: द राइज’ (Pushpa: The Rise)  को दर्शकों को काफी ज्यादा पसन्द किया जा रहा है देशभर में. अगर अल्लू अर्जुन के ही अंदाज में कहे तो ये फिल्म सचमें फ्लावर नहीं फायर है. फिल्म काफी जबरदस्त है फिल्म का एक भी सीन बोरिंग नहीं मालूम होता है. सबकुछ बेहद ही नैचुरल तरीके से किया गया है. इतना ही नहीं इस फिल्म में महिलाओं की हालत को भी काफी संजिदगी से दिखाया गया है. आप भी इस फिल्म के जरिए एक बेटी, प्रेमिका और एक मां की हालत बखूबी समझ सकते हैं हमारे समाज में.

अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) की इस फिल्म में दमदार एक्शन है. अभिनय है. रोमांस है. बदला है साथ ही साथ कॉमेडी भी है. अमीरी है तो उसी के साथ गरीबी भी है. जब गरीबी होगी तो महिलाओं की सच्चाई भी है. फिल्म इतनी जबर है कि नॉर्मल लोग इन सीन को देखकर भी नहीं समझ पाए होंगे. तो चलिए हम आपको बताते हैं…

1. पुष्पा यानी अल्लू अर्जुन की मां की हालत फिल्म में काफी दयनीय है. इसलिए क्योंकि वो बिन ब्याही मां बन जाती है. इससे आज के समाज की तस्वीर दिखती है. क्योंकि बिन ब्याही मां की हालत आज भी सही नहीं है हमारे समाज में. सिंगल मदर को आज भी समाज में नहीं अपनाया जाता है. ये भी पढ़ें: Karan Kundrra’s Mom: फार्महाउस पर विदेशी एक्ट्रेसस को नहीं रोकता मेरा बेटा, समझे Salman?

Pushpa Raaj

हर कोई आकर उन्हें ताने मार कर जाता है. गंदी और नीच बातें उन्हें सुनाई जाती है. इस पूरी फिल्म में भी उसके चरित्र को हर मौके पर तार-तार किया जाता है. पुष्पा जो कि एक बिन बाप का बच्चा है. उसका सरनेम सबसे के लिए मुद्दा बन जाता है. उसके पिता की वजह से उसको बार-बार फिल्म में बेईज्जत किया जाता है. जिससे एक बात तो साफ है जिस मां ने बच्चे को जन्म दिया उसका सरनेम मायने नहीं रखता है. सब बस एक ही बात पूछते हैं कि बाप कौन है?

2. फिल्म के विलेन चंदन की लकड़ी की स्मगलिंग करते हैं. ये विलेन तीन भाई हैं. जिसमें सबसे छोटा भाई है जॉली रेड्डी. जिसके लिए फिल्म में कहा गया है कि जॉली रेड्डी का शबाब और शराब के बिना दम घुटने लगता है. बिना औरत के जॉली की रातें नहीं कटती है. शादी उस इलाके में किसी की भी हो मगर सुहागरात तो सिर्फ जॉली रेड्डी ही मनाता है.

इसका सीधा सा मतलब ये ही है कि जॉली के लिए महिलाएं सिर्फ सेक्स (Sex) की एक वस्तु हैं. जिसे जब चाहे जहां चाहे बिस्तर पर सुलाया जा सकता है. भले फिर महिला की मर्जी हो या नहीं. आज के समाज में भी कुछ लोग महिलाओं को महज सेक्स टॉय ही मानते हैं. जिस वजह से रेप की खबरें आए दिन सुनने को मिल जाती है.

3. फिल्म जब पुष्पा और श्री वल्ली के रिश्ते की बात होती है तो फिल्म में दूल्हे का काफी ज्यादा सम्मान दिखाया गया है. क्योंकि सबको गलतफहमी रहती है कि पुष्पा बहुत ही बड़े और अच्छे खानदान से है. मगर जैसे ही हकीकत सामने आती है लड़की की मां शादी के लिए सबसे पहले मना कर देती है. आज भी हमारे समाज में बेटियों की शादी लोग दूसरे जाति में नहीं करना चाहते हैं.

4. फिल्म में एक बात भी बहुत ही अच्छे तरीके से दर्शायी गई है. वो बात ये है कि फिल्म में दिखाया गया है कि औरतें भी अपराधी हो सकती हैं. फिल्म में जिस तरह सीनू की पत्नी अपने पति के हर अपराध में साथ देती है. सीनू की पत्नी पति और हत्यारे भाई के साथ रहकर उनके जैसे ही हो गयी है.

women

सीनू की पत्नी एक सीन में अपने मामा से कहती है कि जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए उसमें खाद तो डालनी ही पड़ेगी न. खाद के नाम पर वो और उसका पति जिंदा इंसान को ही जमीन में गाड़ देते हैं. इस औरत के सामने ही उसका भाई और पति इतने लोगों की जान लेते हैं. मगर वो कभी मना नहीं करती है. आखिर में वो खुद ही अपने मुंह में ब्लेड दबाकर अपने पति की सीने पर बैठ जाती है उसकी हत्या करने के लिए. जिसका सीधा अर्थ यही है कि महिलाएं भी अपराधी होती हैं.

फिल्म पुष्पा में महिलाओं की जिंदगी से जुड़े ऐसे कई सीन हैं जो समाज की हकीकत को बयां करते हैं. फिल्म में बिन पेंदी का लोटा गाना भी इसी बात को दर्शाता है कि पुरुषों अपनी सोच को बड़ा करो. क्योंकि महिलाएं ब्रेस्ट और वजाइना से बढ़कर सबसे पहले एक इंसान हैं.

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