जब Lata Mangeshkar के गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों… सुनकर रो पड़े थे Pt. Jawaharlal Nehru

Lata Mangeshkar passes away at Mumbai’s Breach Candy hospital at the age of 92: ‘ऐ मेरे वतन के लोगों…’ यह गाना देश के सभी महत्वपूर्ण अवसरों में गाया जाता है। चाहे स्वतंत्रता दिवस हो या गणतंत्र दिवस… इस गाने की लोकप्रियता के पीछे की वजह हैं, लता मंगेशकर। इस गाने के बोल और लता मंगेशकर की आवाज दोनों मिलकर एक अनूठा संगम पेश करते हैं, जो सीधा लोगों के दिल में देश प्रेम की भावना जगा देता है।

कुछ लोग यह भी कहते हैं कि अगर इस गाने को लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने नहीं गाया होता तो शायद यह इतना लोकप्रिय नहीं हुआ होता। लेकिन यह बात बेहद ही कम लोग जानते हैं कि पहले लता मंगेशकर यह गाना नहीं गाना चाहती थीं। उन्होंने इस गाने को गाने से मना कर दिया था। दरअसल, इस गाने को कवि प्रदीप ने लिखा है और उन्हीं ने ही लता मंगेशकर को गाना गाने के लिए मनाया था।

हालांकि, लता ने इस गाने को लेकर एक शर्त रखी थी। उन्होंने बताया कि वह आशा के साथ इसे डुएट में गाना चाहती हैं। आशा और लता ने मिलकर इस गाने का रिहर्सल किया, लेकिन बाद में आशा ने खुद को अलग कर लिया। आशा को खूब मनाने की कोशिश की गई, लेकिन वह नहीं मानी।

लता ने गाने की प्रैक्टिस की और 27 जनवरी 1963 को नेशनल स्टेडियम समारोह में उन्होंने इस गीत को गाया। गाने के खत्म होने के बाद लता मंगेशकर को नेहरू जी का बुलावा आया। जैसे ही लता मंगेशकर नेहरू जी के पास स्टेज पर पहुंची, तभी सभी अतिथि खड़े होकर उनका स्वागत करने लगे। जवाहरलाल नेहरू ने उनके गाने की तारीफ की और इस दौरान उनकी आंखों से आंसू छलक उठे।

लता ने एक इंटरव्यू में बताया की कभी उन्हें खुद भी यह भरोसा नहीं था कि यह गाना इतना लोकप्रिय हो जाएगा। इस गाने के लोकप्रिय होने के बाद लता जी को हर प्रोग्राम में बुलाया जाने लगा।  ये भी पढ़ें- Tejasswi Prakash नहीं बल्कि इस एक्ट्रेस के साथ Romance करना चाहते हैं Karan Kundrra

Source: Gonews

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